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रैक नहीं खुल रहा मेरा....

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जरा और जोर लगाओ...बस थोड़ा सा....जोर लगाया गया। हाथ और कमर दोनों, सीधे हो गये...उफ! तुम्हारा रैक न....नहीं खुल रहा। बुआ...मेरी छुटकी बोली...जरा ऊपर बैठो तो...मैं खींचती हूँ। मैंने सोचा कि लड़की कराटे चैम्पियन है...ये तो पक्का खोल लेगी....मगर फिर ख्याल आया  इतनी छोटी है...इससे होगा? फिर भी विराट बनकर उसका उत्साह बढ़ाया -  ठीक है...बाबू...तुम देखो....जोर थोड़ा और लगा......दम लगाके हइशा...नहीं हो रहा है...अच्छा एक बार और ट्राई मारती हूँ.....और जोर से....खुल..खुल जा...ओहो...इतना परेशान कर रखा है...छुटकी और जमकर...बैठकर पैर दूसरे रैक पर रखकर कोशिश करती है....मेरा खाना पच गया...बुआ...रुको...थोड़ा खाकर आती हूँ। उफ....पसीना - पसीना हो गयी है....जाओ...पहले फ्रेश हो....मेरे पास मत बैठो...और तुम न...रुको....देखते हैं....छुरी लेकर आओ...कहीं कुछ अटका हुआ है...छुरी आ गयी....रैक के पास खाली जगह में ऊपर - नीचे...दायें...बायें घुमायी जाने लगी....अच्छा अब जोर लगाओ तो....फिर दम लगाया गया.....नहीं खुल रहा...कैसे बन्द किया था...देखकर बन्द करना था....छुटकी...हँसे जा रही है....बड़की ने आँखें तरेरी.