हम बड़ों में आदर्श खोजना बंद कर दो, मेरे बच्चों
मैं जानती हूँ कि मेरी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज जैसी है मगर मैं बोलूँगी क्योंकि बोलना जरूरी है..वैसे भी उदय प्रकाश की कविता है आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता। कुछ नहीं सोचने और कुछ नहीं बोलने पर आदमी मर जाता है।" तो आज बोलती हूँ पंजाब के मानसा जिले के रहने वाले परविंदर सिंह झोटा नशे के खिलाफ बड़े पैमाने पर सामाजिक मुहिम चला रहे थे। राज्य में नशा विरोधी अभियान चलाने वाले परविंदर की मंगलवार सुबह अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। जाहिर है कि इस हत्या के पीछे नशा माफिया का हाथ हो तो हैरत नहीं होगी । नशा माफिया का काम है नशा बेचना, वह बेचेंगे मगर हमें भी और खासकर समाज के वरिष्ठ ख्यातिप्राप्त, लब्ध प्रतिष्ठित लोगों को अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है - पत्रकारिता के क्षेत्र में मुझे 22 साल हो गए हैं और इसमें दस साल मैंने बतौर संस्कृतिकर्मी भी काम किया है । जाहिर है कि पत्रकारिता और साहित्य, दोनों ही दुनिया करीब से देखी है । पत्रकारिता के क्षेत्र में मैंने लंबे समय तक उपेक्षा, अपमान का समय जिया है, और यह जानते हुए कि मेरे सामने मेरी प्रशंसा करने वाले मेरे अ...