बहनों के हिस्से की जगह तो छोड़िए
हमारे देश की परम्परा में बहनों का महत्व रहा है, हमेशा से रहा है। माता सरस्वती को भगवान शिव की छोटी बहन कहा गया है और सरस्वती का एक नाम शिवानुजा भी है। श्रीराम समेत चारों भाइयों की बहन शांता थीं। नारायण माता पार्वती के भाई बने। यम -यमी की कहानी हम जानते हैं, सुभद्रा प्रभु जगन्नाथ और दाऊ बलराम के साथ रथ पर विराजमान दिखती हैं। महाभारत के युद्ध में उनकी बड़ी भूमिका रही है। वीर अभिमन्यु का पालन - पोषण द्वारका में ही हुआ। बिहार में छठ महापर्व है और भगवान सूर्य की आराधना के साथ छठी मइया को भी पूजा जाता है। हम बता दें कि सूर्य भगवान की बहन छठी मैया (जिन्हें षष्ठी देवी या छठ माता भी कहा जाता है) हैं। इन्हें ब्रह्मा की मानस पुत्री और सूर्य देव की बहन माना जाता है। इसी कारण छठ पूजा के दौरान सूर्य देव के साथ छठी मैया की पूजा की जाती है। कहने की जरूरत नहीं है कि हमने जितनी बहनों के नाम गिनाए, उनमें से कोई भी बेचारी, मोहताज नहीं है। सभी के व्यक्तित्व प्रखर हैं और सृष्टि के संचालन में उनकी भूमिका रही है, उनको अधिकार मिले हैं। बंगाल में बहनों को सम्पत्ति में अधिकार दिया जाता रहा है। दक्षिण भारत और ...