मंत्री जी दीघा में स्विम सूट....ये कैसा ड्रेस कोड है ?

अगर आप साड़ी या सलवार सूट पहनती हैं तो आपको यह खबर निराश करेगी और परिवार के साथ दुर्गापूजा की छुट्टियों में घूमने की प्लानिंग पर सरकारी पानी फिर सकता है। बात यह है कि राज्य के माननीय मंत्री द्वारा हुकुम जारी किया गया है कि दीघा में समुद्री तट पर महिलाओं को स्विम सूट पहनना ही होगा । इसके लिए सुरक्षा कारणों का हवाला दिया जा रहा है । मजे की बात यह है कि यह बात वह सरकार कर रही है कि जो भारतीय संस्कृति को बचाए रखने की दुहाई देती रही है और जय श्रीराम के नारों के साथ सत्ता में आई है। अब मैं सोच रही हूँ कि बंगाल की उन तीन – चार करोड़ महिलाओं का क्या होगा जो दीघा जाने की सोच रही हैं। भारत में तो घूंघट और बुरके की लड़ाई चल ही रही है कि आप स्वीम सूट पहनाने का सपना देख रहे हैं । क्या भारत के अन्य राज्यों में समुद्र नहीं हैं जहाँ तीर्थाटन नहीं होता ? क्या दीघा की महिमा पुरी के जगन्नाथ धाम से भी ज्यादा हैं या आप दीघा को गोआ बनाने के मूड में हैं ? क्या माता सीता ने समुद्र नहीं देखे होंगे या नदियां नहीं देखी होंगी ? महारानी दुर्गावती, महारानी अहिल्या बाई होल्कर, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, मातांगिनी हाजरा, कल्पना दा, प्रीतिलता वादेदर ने कब स्वीम सूट पहना था ? क्या इंदिरा गांधी या हमारी राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को भी आप यही परामर्श देना चाहेंगे? क्या ग्रामीण इलाकों में समुद्र में जो महिलाएं मछलियां पकड़ने जाती हैं, मंत्री महोदय क्या यह ड्रेस कोड उन पर भी लागू करेंगे ? अगर ऐसा हो तो किसी भी मंत्री को धोती भी नहीं पहननी चाहिए । मेरी समझ में नहीं आता कि यह सारे प्रतिबंध हम महिलाओं पर ही क्यों लागू किये जाते हैं । माननीयों, हम महिलाएं आपकी राजनीति की प्रयोगशाला का रसायन नहीं हैं जिसे आप जब चाहे अपनी सस्ती राजनीति का जरिया बनाते रहे हैं । कौन क्या पहनेगा, क्या अब यह भी सरकार तय करेगी, खासकर तब जब यह परिधान अपनी परम्परा से जुड़ा हो । अभी वैसे ही आपके अन्नपूर्णा योजना के चौदह पन्नों वाले फॉर्म के आतंक से अशिक्षित वंचित महिलाएं परेशान हैं। इन महिलाओं के पास साइबर कैफे में खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं । कई महिलाएं ऐसी हैं जो तलाकशुदा हैं, विधवा हैं या छोड़ दी गयी हैं, घरों में काम करके गुजारा कर रही हैं, वह महिलाएं कहां से फॉर्म भरेंगी ? जिन महिलाओं ने फॉर्म भरा, उनमें से भी कई जरूरतमंद महिलाओं को पैसे नहीं मिल रहे । वे महिलाएं कहाँ जाएं? एक फैशन चल गया है, जैसे ही रक्षाबंधन आए, वैसे ही बसों में महिलाओं के लिए यात्रा फ्री कर दीजिए...नहीं चाहिए महोदय..हमें अपनी इच्छा से जीने दीजिए ।

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